मिचेल मार्श के तूफान में उड़ी चेन्नई, प्लेऑफ की राह हुई मुश्किल
शुक्रवार रात लखनऊ के इकाना स्टेडियम में जो मैच हुआ… वो सिर्फ एक और IPL मुकाबला नहीं लगा।उसमें urgency थी। दबाव था। और चेन्नई सुपर किंग्स के लिए तो शायद थोड़ा डर भी। क्योंकि सीजन अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है जहाँ हर मैच पॉइंट्स टेबल से ज्यादा nerves पर खेला जाता है। एक हार… और पूरा गणित बिगड़ जाता है। CSK मैदान पर उतरी तो इरादा साफ था — हर हाल में जीत।लेकिन सामने मिचेल मार्श थे।और जब मार्श का दिन होता है, तब गेंदबाज़ अक्सर सिर्फ spectator बनकर रह जाते हैं।शुरुआत में सब कुछ चेन्नई के कंट्रोल में लग रहा था 187 रन, IPL के हिसाब से खराब स्कोर बिल्कुल नहीं। कार्तिक शर्मा ने जिस maturity से बल्लेबाज़ी की, उसने चेन्नई को मुश्किल हालत से बाहर निकाला। शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। ऋतुराज गायकवाड़ जल्दी आउट हो गए। फिर संजू सैमसन भी ज्यादा देर नहीं टिक पाए। 36 रन पर दो विकेट। उस वक्त इकाना में बैठे CSK फैंस काफी शांत हो गए थे। वो वाली चुप्पी… जिसमें लोग कुछ बोलते नहीं, बस scoreboard देखते रहते हैं। लेकिन फिर कार्तिक शर्मा ने tempo बदला, 42 गेंदों पर 71 रन।
उन्होंने सिर्फ boundaries नहीं लगाईं… innings को stabilize भी किया। यही सबसे अच्छी बात थी उनकी batting में। दूसरी तरफ डेवाल्ड ब्रेविस ने छोटी लेकिन तेज पारी खेली, और आखिर में शिवम दुबे ने वही किया जिसके लिए वो जाने जाते हैं — आखिरी overs में सीधे attack।
उस वक्त लग रहा था कि चेन्नई ने मैच पकड़ लिया है। लेकिन शायद असली कहानी तब शुरू हुई थी।मिचेल मार्श शुरुआत से ही अलग मूड में दिख रहे थे, पहली कुछ गेंदों में ही समझ आ गया था कि वो रुकने वाले नहीं हैं। ना pitch पढ़ने की कोशिश, ना settle होने का इंतजार, बस मौका मिला… और हमला, जोश इंग्लिस दूसरी तरफ smart cricket खेल रहे थे, लेकिन crowd की नजर बार-बार मार्श पर जा रही थी। क्योंकि हर दूसरा shot boundary नहीं… statement लग रहा था। कुछ pull shots ऐसे थे कि गेंद स्टैंड में जाने के बाद भी लोग कुछ सेकंड तक बस देखते रह गए। 21 गेंदों में फिफ्टी। और सच बोलें तो वहीं से चेन्नई मैच में पीछे दिखने लगी थी। CSK ने सब कोशिश की… लेकिन कुछ काम नहीं आया, Bowling changes हुए। Field बदली गई। Pace variation आया। लेकिन मार्श उस phase में शायद “see ball, hit ball” mode में थे। कभी leg side। कभी straight. कभी extra cover के ऊपर से। और सबसे खतरनाक बात?
वो risky batting भी नहीं लग रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें पहले से पता हो कि कौन सी गेंद कहाँ जाएगी। शतक नहीं आया… लेकिन मैच वहीं खत्म हो गया था मार्श 90 रन पर रन आउट हो गए, 38 गेंद, 9 चौके, 7 छक्के, शतक नहीं बन पाया, लेकिन तब तक damage हो चुका था।
एक पल को लगा कि शायद CSK वापसी कर सकती है। Crowd में भी हल्की आवाज बढ़ी थी। लेकिन फिर निकोलस पूरन आए… और उन्होंने बाकी काम खत्म कर दिया। 17 गेंदों पर नाबाद 32 रन, चार बड़े छक्के। और उसके बाद मैच बस औपचारिकता बन गया। लखनऊ ने 16.4 ओवर में target chase कर लिया। इतनी आसानी से… कि 187 रन भी छोटे लगने लगे। अब प्लेऑफ का दबाव सच में बढ़ चुका है, इस हार के बाद चेन्नई की स्थिति आसान नहीं रही।
12 मैचों में 12 अंक।
अब बाकी दोनों मुकाबले जीतना लगभग जरूरी हो चुका है। लेकिन IPL सिर्फ जीत से नहीं चलता… नेट रनरेट भी कई बार कहानी बदल देता है। और अभी वही CSK की सबसे बड़ी चिंता बन सकता है। दूसरी तरफ लखनऊ सुपर जायंट्स पहले ही प्लेऑफ की रेस से बाहर थी। शायद यही वजह रही कि टीम बिल्कुल खुलकर खेली। और IPL में एक चीज बार-बार सच साबित होती है — जिस टीम के पास खोने के लिए कुछ नहीं बचता… वो सबसे खतरनाक हो जाती है।
निष्कर्ष
चेन्नई के लिए यह सिर्फ एक हार नहीं थी। क्योंकि tournament अब उस stage में है जहाँ छोटी गलती भी सीजन खत्म कर सकती है। और शुक्रवार रात इकाना में… मिचेल मार्श ने सिर्फ तेज पारी नहीं खेली। उन्होंने चेन्नई को याद दिला दिया कि IPL में momentum कितनी जल्दी बदलता है।
लेखक: यशराज यादव
(संपादक, स्काई पब्लिकेशन)
डिस्क्लेमर:
यह लेख मैच रिपोर्ट, उपलब्ध आंकड़ों और सार्वजनिक जानकारी के आधार पर लिखा गया है। इसमें लेखक की शैली के अनुसार वर्णनात्मक और भावनात्मक प्रस्तुति शामिल की गई है ताकि पाठकों तक मैच का रोमांच बेहतर तरीके से पहुंच सके। इसका उद्देश्य किसी खिलाड़ी, टीम या संस्था की छवि को प्रभावित करना नहीं है।